🕉️ हनुमान चालीसा — चौपाई (17)
लंकेश्वर भये सब जग जाना॥
Lankeshwar bhaye sab jag jaana.
📖 अर्थ (Hindi): विभीषण ने आपका दिया हुआ मंत्र (सलाह) स्वीकार किया।
यहाँ “मंत्र” का अर्थ केवल जप नहीं, बल्कि उपदेश, मार्गदर्शन और नीति से है। जब हनुमान जी लंका गए, तब उन्होंने विभीषण को सत्य और धर्म का मार्ग दिखाया।
विभीषण ने अपने भाई रावण के अधर्म को पहचाना और हनुमान जी की प्रेरणा से श्रीराम की शरण में जाने का निर्णय लिया। यह निर्णय आसान नहीं था—क्योंकि इसके लिए उन्हें अपना परिवार और राज्य छोड़ना पड़ा।
यह पंक्ति सिखाती है कि जब हम सही सलाह को स्वीकार करते हैं, भले ही वह कठिन लगे, तो अंततः वह हमें धर्म और सम्मान की ओर ले जाती है।
📚 Meaning (English): Vibhishana accepted your wise counsel.
He followed Hanuman’s guidance and chose righteousness over attachment to wrongdoing.
📖 अर्थ (Hindi): (फलस्वरूप) विभीषण लंका के राजा बने — यह बात समस्त जगत जानता है।
जब विभीषण ने धर्म का साथ दिया, तब श्रीराम ने उन्हें लंका का राजा बनाया। यह दर्शाता है कि धर्म का मार्ग कठिन हो सकता है, पर उसका फल स्थायी और सम्मानजनक होता है।
“सब जग जाना” का अर्थ है—यह घटना प्रसिद्ध है; यह सत्य सर्वमान्य है कि धर्म का चुनाव अंततः विजय दिलाता है।
जीवन में भी जब हम सही निर्णय लेते हैं, चाहे वह प्रारंभ में कठिन लगे, अंततः वह हमें “राज पद” अर्थात सम्मान, आत्मविश्वास और स्थिरता प्रदान करता है।
📚 Meaning (English): As a result, he became the king of Lanka—known throughout the world.
This proves that choosing righteousness ultimately leads to honor and rightful success.
यह चौपाई बताती है कि हनुमान जी केवल बल और पराक्रम के प्रतीक नहीं, बल्कि नीति और धर्म-मार्ग के मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने विभीषण को केवल सलाह नहीं दी—उन्हें सही दिशा दिखाई।
विभीषण का निर्णय इस बात का उदाहरण है कि सच्चा साहस केवल युद्ध में नहीं, बल्कि सत्य का साथ देने में है। जब उन्होंने रावण का साथ छोड़कर श्रीराम की शरण ली, तब उन्होंने धर्म को चुना।
यह प्रसंग हमें सिखाता है कि जीवन में यदि हम सही मार्गदर्शन स्वीकार करें और सत्य का साथ दें, तो परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों—अंततः विजय हमारी होगी।
- सही निर्णय लेने की बुद्धि मिलती है
- अधर्म से दूर रहने की शक्ति मिलती है
- जीवन में सम्मान और स्थिरता आती है
- संकट में सही मार्ग चुनने का साहस मिलता है
- आत्मविश्वास और नैतिक बल बढ़ता है
- धर्म के मार्ग पर दृढ़ता आती है
सही सलाह को स्वीकार करना ही पहला उपकार है जो हम स्वयं पर करते हैं। धर्म का मार्ग कठिन हो सकता है, पर उसका फल “राज पद” अर्थात सम्मान और विजय है।
जय श्री राम 🙏 हनुमान भक्त